कैसे करे गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन(

कैसे करे गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन()
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भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से चतुर्दशी तिथि तक गणेश जी की उपासाना के लिये गणेश चतुर्थी का पर्व मनाते है । श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना चतुर्थी को की जाती है और विसर्जन चतुर्दशी को किया जाता है । माना जाता है की प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवन दुबारा कैलाश पर्वत पर पहुँच जाते है ।स्थापना से जयादा विसर्जन की महिमा होती है ।
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इस दिन अनंत शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है ।इसलिये इस दिन को अनंत चतुर्दशी कहते है ।कुछ विशेष उपाय करके इस दिन जीवन की मुश्किल से मुश्किल समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है ।

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इस दिन व्रत ज़रूर रखी या केवल फलाहार ले ।घर मे स्थापित प्रतिमा का विधिवत पूजन करे पूजन मे नारियल, शमी पत्र और दूब ज़रूर अर्पित करे । इसके बाद प्रतिमा को विसर्जन के लिये ले जाये अगर प्रतिमा छोटी है तो गोद या सिर पर रख कर ले जाये ।प्रतिमा को ले जाते समय भगवान गणेश जी को समर्पित अक्षत घर मे ज़रूर बिखेर दे । घर की तरफ़ चेहरा कर के ले जाये ।चमड़ी की बेल्ट घड़ी य पर्स पास ना रखे । नंगे पैर मूर्ति का वहन और विसर्जन करे ।
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विसर्जन के बाद हाथ जोड़कर श्री गणेश जी से कल्याण और मंगल की प्राथना करे ।अनंत चतुर्दशी का भी सहयोग इसी दिन बना हुआ है ।

विसर्जन के समय क्या विशेष :

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एक भोजपत्र पे या पीला कागज ले अष्ट गंद की स्यायी या लाल स्यायी की कलम भी ले । सबसे पहले स्वस्तिक बनाये उसके वाफ़ी ॐ गण गणपतये नम लिखे । उसके बाद अपनी जो भी समस्याएँ है वो लिखे काट पीट ना करे और कागज के पीछे कूछ ना लिखे । last मे अपना नाम लिखे फिर गणेश मंत्र और फिर स्वस्तिक बनाये ।कागज को मोड़कर रक्षा सूत्र से बाँध ले (मौली ) और गणेश जी को इसे समर्पित करे ।और फिर इससे गणेश जी की मूर्ति के साथ विसर्जित कर दे । आपकी सभी समस्याआे से मुक्ति मिलेगी ।

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अनंत चतुर्दशी भी है तो इस दिन भगवान विष्णु जी की भी पूजा की जाती है । इस दिन व्रत रखें ।इस दिन मोक्ष पाने का विशेष दिन है । बंधन का प्रतीक सूत्र हाथ मे बाधा जाता है और व्रत के परायण के समय इसे खोल दिया जाता है । इसमे नमक का सेवन नही करते और पारायण मे मीठी चीजे जैसे सेवयी या खीर खाते है ।

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इस दिन गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करने से जीवन की सभी समस्ययाओ से मुक्ति मिलती है ।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह
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शुक्र स्त्री गृह है ,मनुष्य की कामुकता से इसका सीधा सम्बन्ध भी है ,और हर प्रकार के सौंदर्य और ऐश्वर्य से ये सीधे सम्बन्ध रखता है .शुक्र के लिए ओपल ,हीरा , स्फटिक का प्रयोग करना चहिये।शुक्र देव का ध्यान करने से शुभता में वृ्द्धि होती है। इसके दौरान शुक्र मंत्र का जाप करने से भी शुक्र के उपाय के फलों को सहयोग प्राप्त होता है ।
शुक्र गृह का रत्न/रत्न धारण :—हीरा अथवा जरकिन , श्वेत पुखराज – चांदी या श्वेत धातु में मढ़वा कर पंचोपचार पूजन, प्राण प्रतिष्ठा करा कर पहने ।

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यह रत्न शुक्र को बलवान बनाने के लिए धारण किये जाते है तथा धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे सांसरिक सुख-सुविधा, ऐशवर्य, मानसिक प्रसन्नता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। हीरे के अतिरिक्त शुक्र को बल प्रदान करने के लिए सफेद पुखराज भी पहना जाता है। शुक्र के यह रत्न रंगहीन तथा साफ़ पानी या साफ़ कांच की तरह दिखते हैं। रत्न धारण करने से ग्रह बलवान हो जाता है परन्तु ये सुनिश्चित कर लें की आपकी कुंडली के हिसाब से रत्न धारण कर सकते हैं या नहीं। अच्छा रहेगा किसी योग्य ज्योतिषी से रत्न धारण की सलाह ले ।

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शुक्र ग्रहों में सबसे चमकीला है और प्रेम का प्रतीक है. इस ग्रह के पीड़ित होने पर आपको ग्रह शांति रंगीन वस्त्र, रेशमी कपड़े, घी, सुगंध, चीनी, खाद्य तेल,कपूर का दान शुक्र ग्रह की विपरीत दशा में सुधार लाता है।
दान व्रत ,जाप – शुक्रवार के नमक रहित व्रत रखें , साथ में “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”
शुक्र ग्रह से सम्बन्धित क्षेत्र में आपको परेशानी आ रही है तो इसके लिए आप शुक्रवार के दिन व्रत रखें. मिठाईयां एवं खीर कौओं और गरीबों को दें. ब्राह्मणों एवं गरीबों को घी भात खिलाएं।
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गणेश जी के मंत्र, मूर्ति, कवच सभी की जानकारी

गणेश जी के मंत्र, मूर्ति, कवच सभी की जानकारी
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श्रीगणेश #कवचम् का नियमित रूप से पाठ करने से जातक को धन धान्य और समस्त सुखों की प्राप्ति होती है ! श्री गणेश कवचम् का दस लाख बार जाप करने से सिद्ध हो जाता हैं ! सिद्ध करने से बाद श्री गणेश कवचम् का पाठ करने से जातक के ऊपर मारण, उच्चाटन, भूत-प्रेत, पिशाच, कूष्‍माण्‍ड, ब्रह्मराक्षस, डाकिनी, योगिनी, वेताल और मोहन आदि प्रभाव नही होता हैं

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श्री गणेश को तिल से बनी वस्तुओं, तिल-गुड़ के लड्‍डू तथा मोदक का भोग लगाएं। ‘ॐ सिद्ध बुद्धि सहित #महागणपति आपको नमस्कार है। नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है।’
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🙏🏻 हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं
सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याऐं आ रही हैं वो नष्ट हों |
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छः मंत्र इस प्रकार हैं –
🌷 ॐ #सुमुखाय नम: :
🌷 ॐ #दुर्मुखाय नम: :
🌷 ॐ #मोदाय नम: :
🌷 ॐ #प्रमोदाय नम: :
🌷 ॐ #अविघ्नाय नम:
🌷 ॐ #विघ्नकरत्र्येय नम:
🙏🏻
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➡ चमत्कारी हैं श्रीगणेश की ये 11 मूर्तियां, इस खास दिन लाएं घर
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🌺 #चांदी के गणेशजी
जो लोग धन इच्छा रखते है, उन्हें चांदी से निमित्त गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना व पूजा करनी चाहिए।
इन्हें अपने घर के पूजा घर में स्थापित कर दूर्गा चढ़ाने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
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🌺 #मूंगा के गणेशजी
मूंगा लाल रंग का एक रत्न होता है। इससे निर्मित्त श्रीगणेश की प्रतिमा को पूजा-स्थान पर स्थापित करने व रोज पूजा करने से शत्रुओं का भय समाप्त हो जाता है।

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🌺 #पन्ना के गणेशजी
पन्ना हरे रंग का एक रत्न होता है। इससे निर्मित्त श्रीगणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित कर पूजा करने पर वृद्धि व यश की प्राप्ति होती है।
विद्यार्थीयों के लिए पन्ना के गणेशजी की पूजा करना श्रेष्ठ होता है।
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🌺 #चंदन के गणेशजी
चंदन की लकड़ी से निर्मित्त श्रीगणेश की प्रतिमा घर में कही भी स्थापित कर सकते है।
इससे घर में किसी प्रकार की विपदा नहीं आती साथ ही परिवार के सदस्यों में सामंजस्य बना रहता है।
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🌺 #बांसुरी बजाते गणेशजी
यदि आपके घर में रोज क्लेश या विवाद होता है तो आपको बांसुरी बजाते हुए श्रीगणेश की तस्वीर या मूर्ति घर में स्थापित करना चाहिए।
बांसुरी बजाते हुए श्रीगणेश की पूजा करने से घर में सुख-शांति का वातावरण रहता है।
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🌺 #हाथी पर बैठे गणेशजी
यदि आप धन की इच्छा रखते है तो आपको हाथी पर बैठे श्रीगणेश की पूजा करनी चाहिए।
हाथी पर विराजित श्रीगणेश की पूजा करने से पैसा, इज्जत व शौहरत मिलती है।
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🌺 #नाचते हुए गणेशजी
नाचते हुए गणेशजी की पूजा करने से मन को शांति का अनुभव होता है। यदि आप तनाव में हैं तो आपको प्रतिदिन नाचते हुए श्रीगणेश की पूजा करनी चाहिए।
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🌺 #कमल पर बैठे गणेशजी
कमल पर बैठे गणेशजी धन-संपत्ति की इच्छा हो उन्हें कमल पर बैठे श्रीगणेश की पूजा करनी चाहिए।
निर्धन व्यक्ति रोज गणेशजी के इस स्वरूप की पूजा करें तो धन-संबंधी उसकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
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🌺 #सफेद रंग के गणेशजी
जीवन में शांति चाहिए तो सफेद रंग की गणेश प्रतिमा का पूजन करना चाहिए क्योंकि सफेद रंग शांति का प्रतीक है।
सफेद रंग की गणेश प्रतिमा की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में शांति का अनुभव होता है।
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🌺 #बालगणेश
यदि आप संतान चाहते है तो इसके लिए भगवान श्रीगणेश के बाल स्वरूप का पूजन करना चाहिए।
रोज बाल गणेश की प्रतिमा का पूजन कर लड़ुओं का भोग लगाएं व उत्तम संतान के लिए प्रार्थना करें
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🌺 #सफेदआंकड़े के गणेशजी
ज्योतिष उपायों में सफेद आंकड़ा (एक प्रकार का पौधा) की जड़ से निर्मित्त श्रीगणेश का विशेष महत्व है।
इस श्वेतार्क गणपति भी कहते है। श्वेतार्क गणपति को घर में स्थापित कर पूजा करने पर ऊपरी बाँधा का असर नही होता।
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इच्छा पूरी करने के लिए

#इच्छा पूरी करने के लिए

एक तेज पत्ता पर अपनी इच्छा लिखें। मान लेना शुरू करें कि आपकी इच्छा पूरी हो रही है और फिर मोमबत्ती, दीया या कपूर का उपयोग करके तेज पत्ती को जलाएं।
यह उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके करें।

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अनंत चतुर्दशी पर विशेष करे

अनंत चतुर्दशी पर विशेष करे
कैसे करे गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से चतुर्दशी तिथि तक गणेश जी की उपासाना के लिये गणेश चतुर्थी का पर्व मनाते है । श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना चतुर्थी को की जाती है और विसर्जन चतुर्दशी को किया जाता है । माना जाता है की प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवन दुबारा कैलाश पर्वत पर पहुँच जाते है ।स्थापना से जयादा विसर्जन की महिमा होती है ।
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इस दिन अनंत शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है ।इसलिये इस दिन को अनंत चतुर्दशी कहते है ।कुछ विशेष उपाय करके इस दिन जीवन की मुश्किल से मुश्किल समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है ।

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इस दिन व्रत ज़रूर रखी या केवल फलाहार ले ।घर मे स्थापित प्रतिमा का विधिवत पूजन करे पूजन मे नारियल, शमी पत्र और दूब ज़रूर अर्पित करे । इसके बाद प्रतिमा को विसर्जन के लिये ले जाये अगर प्रतिमा छोटी है तो गोद या सिर पर रख कर ले जाये ।प्रतिमा को ले जाते समय भगवान गणेश जी को समर्पित अक्षत घर मे ज़रूर बिखेर दे । घर की तरफ़ चेहरा कर के ले जाये ।चमड़ी की बेल्ट घड़ी य पर्स पास ना रखे । नंगे पैर मूर्ति का वहन और विसर्जन करे ।
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विसर्जन के बाद हाथ जोड़कर श्री गणेश जी से कल्याण और मंगल की प्राथना करे ।
# गणेश विसर्जन इस दिन इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

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ललिता षष्ठी का व्रत आज

ललिता षष्ठी का व्रत आज


ललिता षष्ठी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक पवित्र व्रत है, जिसे ‘मोरछाई छठ’ या ‘संतान षष्ठी व्रत’ भी कहा जाता है।

मुख्य महत्व

संतान सुख:

यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।

कथा और मान्यता:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर योग्य संतान की प्राप्ति होती है और संतान के संकट दूर होते हैं।

ललिता सखी प्राकट्य:

इस्कॉन और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसे श्री राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी के प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जो राधाष्टमी से दो दिन पहले पड़ता है।

पूजन विधि

देवी की आराधना:

इस दिन माता गौरी, भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है।

प्रसाद:

पूजा के बाद मेवा, मिष्ठान्न, खीर और मालपुआ का प्रसाद बांटा जाता है।

गणेश उत्सव में सिर्फ मोदक नहीं जानें बप्पा के प्रिय भोग की पूरी सूची

🕉गणेश उत्सव में सिर्फ मोदक नहीं जानें बप्पा के प्रिय भोग की पूरी सूची🕉
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⭕गणेश चतुर्थी का पर्व आते ही घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बप्पा के स्वागत में सजावट से लेकर पूजा-पाठ तक हर चीज का खास महत्व होता है। भगवान गणेश को सबसे प्रिय भोग के रूप में मोदक का नाम सबसे पहले लिया जाता है, लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में गणपति को कई तरह के पारंपरिक व्यंजन भी अर्पित किए जाते हैं।

देश की विविध संस्कृति और खानपान की परंपराओं के कारण गणेश पूजा में चढ़ाए जाने वाले भोग भी अलग-अलग होते हैं। कहीं मोदक तो कहीं लड्डू, पूरण पोली और अन्य स्थानीय पकवानों से बप्पा को प्रसन्न किया जाता है।

🪔महाराष्ट्र का खास भोग: मोदक
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महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के दौरान मोदक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान गणेश को मोदक बेहद प्रिय हैं, इसलिए पूजा में इसका भोग जरूर लगाया जाता है।

महाराष्ट्र में उकडीचे मोदक यानी भाप से बने मोदक काफी लोकप्रिय हैं। चावल के आटे से बने इस मोदक के अंदर नारियल और गुड़ की भरावन होती है। इसे शुद्धता और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है।

🪔कर्नाटक का कडुबू
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कर्नाटक में भगवान गणेश को कडुबू का भोग लगाया जाता है। यह मोदक जैसा ही एक पारंपरिक पकवान है, जिसे चावल के आटे और मीठी भरावन से बनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर दक्षिण भारत के कई घरों में इसे विशेष रूप से तैयार किया जाता है और पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

🪔तमिलनाडु का कोझुकट्टई
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तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी के दौरान कोझुकट्टई भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है। यह भी मोदक का ही एक रूप माना जाता है।

इसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है और इसमें नारियल, गुड़ और इलायची जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। दक्षिण भारत में यह गणपति पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🪔उत्तर भारत में लड्डू और पंचामृत
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उत्तर भारत में भगवान गणेश को बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू और पंचामृत का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगहों पर गणपति पूजा में फल, मिठाई और अन्य सात्विक व्यंजन भी अर्पित किए जाते हैं।

लड्डू को शुभता और मिठास का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे धार्मिक आयोजनों में खास स्थान दिया जाता है।

🪔गोवा और कोंकण क्षेत्र के खास पकवान
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गोवा और कोंकण क्षेत्रों में गणेश उत्सव के दौरान कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इनमें नारियल और गुड़ से बने पकवानों का विशेष महत्व होता है।

यहां गणपति उत्सव केवल पूजा तक सीमित नहीं होता, बल्कि परिवार और समुदाय को जोड़ने वाला सांस्कृतिक पर्व भी माना जाता है।

🪔भगवान गणेश को भोग लगाने की परंपरा
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को शुद्ध मन और श्रद्धा से चढ़ाया गया भोग प्रिय होता है। भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसे बनाने की विधि का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।

गणपति पूजा में भोग केवल भोजन नहीं बल्कि भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि देश के हर हिस्से में अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार बप्पा को अलग-अलग व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

मोदक भले ही भगवान गणेश का सबसे प्रसिद्ध भोग माना जाता है, लेकिन भारत की विविध परंपराएं दिखाती हैं कि बप्पा के स्वागत में देशभर में स्वाद और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
🚩#ऊँश्रीगणेशायनम:🚩

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12 आदित्य और उनके मंत्र

12 आदित्य और उनके मंत्र (12 Aditya Mantras)

  1. धाता आदित्य मंत्र:
    • ॐ धात्रे नमः (सृष्टि के पालनकर्ता व रचयिता)
  2. मित्र आदित्य मंत्र:
    • ॐ मित्राय नमः (सबके मित्र और स्नेह बढ़ाने वाले)
  3. अर्यमा आदित्य मंत्र:
    • ॐ अर्यम्णे नमः (समाज और नियम के देवता)
  4. वरुण आदित्य मंत्र:
    • ॐ वरुणाय नमः (जल और जीवन के नियंत्रक)
  5. इंद्र आदित्य मंत्र:
    • ॐ इंद्राय नमः (बल और ऐश्वर्य के दाता)
  6. विवस्वान (विवस्वान्) आदित्य मंत्र:
    • ॐ विवस्वते नमः (अग्नि और तेज के प्रतीक)
  7. पूषा आदित्य मंत्र:
    • ॐ पूष्णे नमः (पोषण और वृद्धि करने वाले)
  8. पर्जन्य आदित्य मंत्र:
    • ॐ पर्जन्याय नमः (वर्षा और जीवनदाता)
  9. त्वष्टा आदित्य मंत्र:
    • ॐ त्वष्ट्रे नमः (शिल्प और निर्माण के देवता)
  10. विष्णु आदित्य मंत्र:
    • ॐ विष्णवे नमः (सर्वव्यापक शक्ति)
  11. अंशमान (अंशूमान) आदित्य मंत्र:
    • ॐ अंशमते नमः (किरणों के देवता)
  12. सविता आदित्य मंत्र:
    • ॐ रवये नमः / ॐ सवित्रे नमः (ऊर्जा और स्फूर्ति के प्रदाता)

(नोट: इन बारह नामों का जाप करने से स्वास्थ्य, तेज, मान-सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।)

शुक्र पर ग्रहों का प्रभाव और प्रेम में आपकी सबसे बड़ी कमजोरी

शुक्र पर ग्रहों का प्रभाव और प्रेम में आपकी सबसे बड़ी कमजोरी

अगर आप किसी से प्रेम करते हैं, तब आपकी सबसे बड़ी कमजोरी क्या बनती है,
सामने वाले से बहुत ज्यादा भावनात्मक जुड़ जाना, उसके ऊपर अधिकार जताना, हर बात का मतलब निकालना, जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएँ रखना, प्रेम में अस्वीकार होने से डरना या ऐसे व्यक्ति के पीछे उलझ जाना जिसे पाना आसान नहीं है।
इसमें शुक्र पर प्रभाव डालने वाले ग्रह की प्रकृति भी दिखाई देती है।

जन्मकुंडली में शुक्र प्रेम, आकर्षण, संबंधों में सुख, पसंद, रोमांस और किसी व्यक्ति के प्रति आकर्षित होकर उससे जुड़ने की प्रवृत्ति का प्रमुख कारक माना जाता है।
चंद्रमा बताता है कि प्रेम में भावनात्मक जुड़ाव कितना गहरा होगा, मंगल आकर्षण, इच्छा और अधिकार की भावना से, बुध बातचीत और मानसिक जुड़ाव से तथा पंचम और सप्तम भाव प्रेम और संबंधों की वास्तविक परिस्थितियों से संबंधित हैं।
शुक्र के साथ किसी ग्रह की युति, उस ग्रह की दृष्टि शुक्र पर पड़ने अथवा कुंडली में शुक्र के साथ उसका अन्य स्पष्ट संबंध बनने पर प्रेम के व्यवहार में उस ग्रह की प्रकृति दिखाई देती है।

शुक्र को सूर्य प्रभावित करे तो जातक प्रेम में केवल अपनापन नहीं चाहता, बल्कि यह भी चाहता है कि साथी उसे महत्व और सम्मान दे। साथी उसकी योग्यता की प्रशंसा करे, उसके व्यक्तित्व को स्वीकार करे और संबंध में उसकी एक विशेष जगह हो।यह उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी उपेक्षा या महत्व न मिलने को दिल पर लेना बन सकती है।
सूर्य शुभ और बली हो तो व्यक्ति प्रेम में अपने आत्मसम्मान की स्वस्थ सीमा बनाए रखता है और साथी को भी पर्याप्त सम्मान देता है। सूर्य निर्बल हो तथा शनि, राहु या केतु की युति-दृष्टि से अधिक प्रभावित हो, तो साथी की छोटी उपेक्षा को भी अपने महत्व में कमी समझने, प्रेम में अहं की समस्या आने या बार-बार यह जानने की इच्छा बढ़ सकती है कि सामने वाला उसे कितना महत्व देता है।

शुक्र को चंद्रमा प्रभावित करे तो जातक प्रेम में भावनात्मक रूप से बहुत गहराई से जुड़ सकता है। साथी का बोलने का तरीका, समय देना, संदेश भेजना, हालचाल पूछना और भावनात्मक रूप से उपलब्ध रहना उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी साथी के व्यवहार से अपनी मनःस्थिति को बहुत अधिक जोड़ लेना हो सकती है।
चंद्रमा शुभ, बली और स्थिर हो तो व्यक्ति प्रेम में संवेदनशील होने के बावजूद भावनात्मक संतुलन बनाए रखता है और साथी की प्रत्येक छोटी बात को रिश्ते में बदलाव का संकेत नहीं मानता। चंद्रमा बहुत क्षीण हो तथा शनि, राहु या केतु की युति-दृष्टि से पीड़ित हो, तो साथी के थोड़े दूर होने, देर से जवाब देने या व्यवहार बदलने पर असुरक्षा, बेचैनी और बार-बार उसी बात को सोचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

शुक्र को मंगल प्रभावित करे तो जातक प्रेम में आकर्षण और इच्छा को बहुत तीव्रता से महसूस कर सकता है। किसी व्यक्ति को पसंद करने पर उसके करीब आने और संबंध को आगे बढ़ाने की इच्छा तेज होती है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी आकर्षण और जुनून में जल्दबाजी करना अथवा साथी पर अधिकार की भावना बढ़ जाना हो सकती है।
मंगल शुभ और बली हो तो व्यक्ति प्रेम में साहसी, स्पष्ट और अपने साथी के लिए खड़ा रहने वाला होता है। मंगल शनि या राहु की युति-दृष्टि से प्रभावित हो और शुक्र भी निर्बल हो, तो ईर्ष्या, क्रोध, अधिकार जताने, साथी से तुरंत प्रतिक्रिया चाहने या तीव्र शारीरिक आकर्षण के कारण रिश्ते की वास्तविकता समझने से पहले बहुत अधिक जुड़ जाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

शुक्र को बुध प्रभावित करे तो जातक प्रेम में बातचीत और मानसिक जुड़ाव को बहुत महत्व देता है। सामने वाला कैसे बात करता है, कितना समझदार है, कितना हँसाता है और उससे कितनी सहज बातचीत होती है – यह आकर्षण का महत्वपूर्ण कारण बन सकता है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी रिश्ते की हर छोटी बात का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण करना हो सकती है।
बुध शुभ और बली हो तो व्यक्ति प्रेम में अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है और बातचीत से रिश्ते की समस्याओं को सुलझाने की क्षमता रखता है। बुध अस्त, अत्यधिक निर्बल अथवा राहु-केतु की युति-दृष्टि से प्रभावित हो और शुक्र भी कमजोर हो, तो संदेश के शब्दों, जवाब मिलने के समय, बोलने के तरीके और छोटी-छोटी बातों के अर्थ निकालकर स्वयं को उलझाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

शुक्र को गुरु प्रभावित करे तो जातक प्रेम में अच्छे चरित्र, विश्वास, समझदारी, संस्कार और भविष्य की स्थिरता को महत्व देता है। वह केवल आकर्षण से संतुष्ट नहीं होता, बल्कि चाहता है कि साथी उसके जीवन-मूल्यों के अनुरूप भी हो। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी साथी से बहुत ऊँची अपेक्षाएँ रखना हो सकती है।
गुरु शुभ और बली हो तो व्यक्ति प्रेम में उदार, समझदार और क्षमा करने वाला होता है तथा संबंध को सही दिशा देने की कोशिश करता है। गुरु निर्बल हो और राहु या शनि की युति-दृष्टि से प्रभावित हो, तो अपने मन में आदर्श साथी की ऐसी छवि बना सकता है जिसे वास्तविक व्यक्ति के लिए पूरा करना कठिन हो। कई बार साथी को लगातार समझाने, सुधारने या अपने विचारों के अनुसार चलाने की कोशिश भी बढ़ सकती है।

शुक्र को शनि प्रभावित करे तो जातक प्रेम में जल्दी भरोसा करने की अपेक्षा पहले सामने वाले की गंभीरता और स्थिरता को परखना चाहता है। प्रेम होने के बावजूद भावनाएँ व्यक्त करने में समय लग सकता है और संबंध टूटने या अस्वीकार किए जाने का भय भीतर रह सकता है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी दिल खोलने से पहले जरूरत से ज्यादा सुरक्षा तलाशना हो सकती है।
शनि शुभ और बली हो तो व्यक्ति प्रेम में जिम्मेदार, वफादार और लंबे समय तक संबंध निभाने वाला होता है। शनि राहु या केतु की युति-दृष्टि से अधिक प्रभावित हो और शुक्र भी निर्बल हो, तो पुराने भावनात्मक दुख को लंबे समय तक पकड़े रखने, प्रेम होते हुए भी दूरी बनाए रखने या सामने वाले पर भरोसा करने में अत्यधिक समय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

शुक्र को राहु प्रभावित करे तो जातक के प्रेम और आकर्षण में तीव्रता बढ़ सकती है। सामान्य से अलग, रहस्यमय, सामाजिक रूप से अलग पृष्ठभूमि वाला अथवा आसानी से उपलब्ध न होने वाला व्यक्ति विशेष आकर्षण पैदा कर सकता है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी जिस व्यक्ति या रिश्ते को पाना कठिन हो, उसी के पीछे अधिक उलझ जाना हो सकती है।
शुक्र-राहु की निकट युति हो और शुक्र को गुरु, चंद्रमा अथवा अन्य शुभ प्रभाव का सहारा न मिले, तो आकर्षण को प्रेम समझने, सामने वाले को वास्तविकता से अधिक विशेष मानने या अनिश्चित रिश्ते में भी उम्मीद बनाए रखने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। कई बार जो व्यक्ति आसानी से उपलब्ध और स्थिर है, उसकी अपेक्षा जो दूरी बनाए रखता है वही मन पर अधिक प्रभाव डाल सकता है। एस्ट्रो अनन्या

शुक्र को केतु प्रभावित करे तो जातक प्रेम में ऐसी स्थिति अनुभव कर सकता है जिसमें आकर्षण होने के बावजूद भीतर किसी अनजानी कमी का अनुभव बना रहता है। किसी व्यक्ति की ओर बहुत आकर्षण हो सकता है, लेकिन संबंध बनने के बाद वही तीव्रता अचानक कम भी हो सकती है। इसलिए प्रेम में सबसे बड़ी कमजोरी अपनी ही भावनाओं को स्पष्ट रूप से न समझ पाना हो सकती है।
शुक्र-केतु की निकट युति हो और शुक्र को गुरु, चंद्रमा अथवा अन्य शुभ ग्रहों का सहारा न मिले, तो व्यक्ति कभी बहुत अधिक जुड़ सकता है और कभी अचानक भावनात्मक दूरी बना सकता है। सामने वाला यह समझ नहीं पाता कि संबंध में ऐसा क्या बदल गया, जबकि जातक स्वयं भी कई बार अपनी असंतुष्टि का स्पष्ट कारण नहीं समझ पाता।

शुक्र स्वयं मजबूत हो
शुक्र अपनी राशि वृषभ या तुला में, उच्च राशि मीन में अथवा अन्य प्रकार से शुभ और बलवान हो, तो व्यक्ति प्रेम और संबंधों में अपनी पसंद तथा जरूरतों को अपेक्षाकृत बेहतर समझता है। वह आकर्षण और वास्तविक संबंध के बीच अंतर करने की क्षमता रखता है तथा प्रेम में देने और पाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
लेकिन मजबूत शुक्र का अर्थ यह नहीं कि प्रेम जीवन में कभी कमजोरी नहीं होगी। यदि शुक्र पर मंगल या राहु का बहुत अधिक प्रभाव हो अथवा चंद्रमा, पंचम भाव और सप्तम भाव भी शनि, राहु या केतु से पीड़ित हों, तो मजबूत आकर्षण क्षमता के साथ प्रेम में अत्यधिक आसक्ति, अपेक्षा या भावनात्मक उलझन भी दिखाई दे सकती है।

शुक्र पर एक से अधिक ग्रहों का प्रभाव हो
तब प्रेम में कमजोरी भी मिश्रित रूप लेती है। शुक्र-चंद्र-मंगल संबंध में जातक भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तर पर जल्दी गहराई से जुड़ सकता है तथा साथी की दूरी सहन करना कठिन हो सकता है। शुक्र-बुध-राहु संबंध में बातचीत से आकर्षण बहुत तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन हर संदेश और व्यवहार का जरूरत से ज्यादा अर्थ निकालने की प्रवृत्ति भी रह सकती है। शुक्र-गुरु-शनि संबंध में जातक गंभीर और स्थायी प्रेम चाहता है, लेकिन साथी को चुनने में बहुत ऊँचे मानक और भरोसा करने में अधिक समय उसकी कमजोरी बन सकते हैं। शुक्र-मंगल-राहु संबंध में तीव्र आकर्षण, जुनून और कठिन व्यक्ति को पाने की इच्छा बहुत बढ़ सकती है, जबकि शुक्र-शनि-केतु संबंध में प्रेम की इच्छा होने के बावजूद भावनात्मक दूरी और अस्वीकार होने का डर व्यक्ति को पूरी तरह खुलने से रोक सकता है।

प्रेम में आकर्षित होना और प्रेम को निभाना दो अलग बातें हैं। शुक्र बताता है कि व्यक्ति प्रेम, आकर्षण और संबंधों में सुख को किस प्रकार अनुभव करता है। चंद्रमा बताता है कि भावनात्मक जुड़ाव कितना गहरा होगा; मंगल बताता है कि इच्छा, जुनून और अधिकार की भावना कितनी तेज होगी और बुध बताता है कि बातचीत तथा मानसिक जुड़ाव कितना महत्वपूर्ण होगा।
शनि यह दिखाता है कि प्रेम में सुरक्षा, समय और स्थिरता की आवश्यकता कितनी है। इसलिए शुक्र के साथ चंद्रमा, मंगल, बुध, शनि, पंचम भाव, सप्तम भाव और इन पर पड़ने वाले ग्रहों के प्रभाव को साथ देखकर ही प्रेम में व्यक्ति की वास्तविक कमजोरी समझनी चाहिए।

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